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netaji subhas chandra

इंडिया बायोग्राफी ब्लॉग में आपका स्वागत है, इस बायो लेख में आप भारत के महान क्रन्तिकारी और जन सेवक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन परिचय (Subhas Chandra Bose Biography in Hindi) से जुड़ी जानकारी प्राप्त करेंगे, चलिए जान लेते हैं की नेताजी कौन थे? नेताजी से जुड़े कुछ सवाल जो इंटरनेट पर हमेशा सर्च होते हैं जैसे – सुभाष चंद्र बोस की कहानी, सुभाष चंद्र बोस के बारे में निबंध, सुभाष चंद्र बोस की बेटी, सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई, सुभाष चंद्र बोस का पूरा नाम और सुभाष चंद्र बोस को किसने मारा आदि। इस पोस्ट में आपको इनसब सवालों के जबाब देने का प्रयास किया गया है उम्मीद है आपको जानकारी पसंद आएगी।

जीवन परिचय – नेताजी सुभाष चंद्र बोस कौन थे?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी भारत के महान क्रान्तिकारियो में से एक थे, इन्होने “आजाद हिन्द फ़ौज़” का निर्माण किया था, भारत को आजादी दिलाने में इनका भी काफी महत्वपूर्ण योग्यदान रहा है। इन्हें “आजाद हिन्द फ़ौज़” का सुप्रीम कमाण्डर भी कहा जाता है। यह 1921 से 1945 तक भारत की आजादी के लिए कार्य किये थे। इनका “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा” नारा बहुत प्रसिद्ध रहा जो आजादी के समय काफी कामयाब रहा था। आजादी की लड़ाई में सुभाष चन्द्र बोस वर्ष 1921 से 1945 तक रहे थे।

Subhas Chandra Bose Biography in Hindi – संछिप्त परिचय

Subhas Chandra Bose Biography in Hindi

वास्तविक नाम – सुभाष चन्द्र बोस
अन्य नाम – शुभाष चॉन्द्रो बोशु
प्रचलित नाम – नेताजी
जन्म – 23 जनवरी 1897 कटक, बंगाल प्रेसीडेंसी
राष्ट्रीयता – भारतीय
शिक्षा – बी०ए० (आनर्स)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष – 1938 में
प्रसिद्धि मिली – भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी होने की वजह से
पत्नी – एमिली शेंकल
विवाह का वर्ष – 1937
दुनिया (जनता) को विवाह के बारे में जानकारी – 1993 में
संतान – अनिता बोस फाफ
भाई – शरतचन्द्र बोस
भतीजा – शिशिर कुमार बोस
कोलकाता में इनके नाम से कई संस्था और धार्मिक जगह है
मृत्यु – 18 अगस्त 1945 को
मृत्यु के बारे में आजतक किसी को सही जानकारी नहीं

सुभाष चन्द्र बोस की शिक्षा –

नेताजी ने अपनी शुरुआती शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेण्ट स्कूल से की थी, उसके बाद इन्होने वर्ष 1909 में रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में एडमिशन लिया था, इनके कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास इनसे काफी प्रभावित हुए थे, बताया जाता है की नेताजी ने महज १५ वर्ष की उम्र में ही विवेकानन्द जी के साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर डाला था। इनके बारे में कहा जाता है की जब यह वर्ष 1915 में इंटर की पढाई कर रहे थे तो बीमार हो गए थे जिसकी वजह से इण्टरमीडियेट की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण किये थे। वर्ष 1916 में जब नेताजी दर्शनशास्त्र (ऑनर्स) में बीए की पढ़ाई कर रहे थे उस समय कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच इनका झगड़ा हो गया था, जिसकी वजह से इनको प्रेसीडेंसी कॉलेज से एक साल के बाहर कर दिया गया था और परीक्षा भी नहीं देने दिया गया था।

बाद में समय बीतने के साथ नेताजी ने 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट में भर्ती के लिए आवेदन किया, और भर्ती होने के लिए गए मगर आँखें खराब होने के कारण उनको सेना में नहीं लिया गया, बाद में किसी तरह से इन्होने स्कॉटिश चर्च कॉलेज में एडमिशन लिया मगर इनके मन में सेना में जाने की बात चलती रहती थी, इसी बीच खाली समय पाकर इन्होने टेरीटोरियल आर्मी की परीक्षा दे डाली जिसके बाद इनका सिलेक्शन फोर्ट विलियम के सेनालय में रँगरूट के रूप में हुआ, उसी समय यह खूब मेहनत करके वर्ष 1919 में बीए (ऑनर्स) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर ली। उस ज़माने में कलकत्ता यूनिवर्सिटी में इनका दूसरा स्थान रहा था।

इनके पिताजी की इच्छा थी कि नेताजी आईएएस बने किन्तु उनकी उम्र को देखकर केवल एक बार ही परीक्षा पास करनी थी, जिसकी वजह से उनके पिताजी काफी परेशान रहते थे उसी बीच सुभाष चंद्र जी ने आईएएस की परीक्षा देने का फैसला किया और वे 15 सितम्बर 1919 को तैयारी करने इंग्लैण्ड चले गये। वहां लंदन में उनको एडमिशन नहीं मिला तो वह किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास (ऑनर्स) की परीक्षा का अध्ययन करने लगे बाद में इन्होने आईएएस की परीक्षा दी और वर्ष 1920 में इन्होने आईएएस में चौथा स्थान हासिल किया।

आईएएस की नौकरी से इस्तीफा –

उन दिनों की बात है जब नेताजी सुभाष चंद्र आईएएस की नौकरी करने लगे थे, तब कुछ दिनों बाद इनको एहसास होने लगा की आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे? ऐसे में कुछ समय बाद इन्होने आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और देश को आजाद करवाने में लग गए।

स्वतन्त्रता संग्राम में प्रवेश –

नेताजी ने बंगाल के स्वतन्त्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के कार्यों से प्रेरित होकर स्वतन्त्रता संग्राम में प्रवेश लिया था, इंग्लैंड से उन्होंने दासबाबू को लेटर लिखकर देशबंधु जी के साथ काम करने की इक्ष्छा जताई थी। बाद में रवींद्रनाथ ठाकुर की सलाह पर नेताजी भारत आये और वर्ष 1921 में पहली बार महात्मा गाँधी से मिले और मुलाकात की। गाँधी जी ने सबसे पहले उनको दासबाबू के साथ काम करने की सलाह दी थी।

उन दिनों गाँधी जी द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू किये थे, उसी समय बंगाल में दासबाबू इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उन्हीं के साथ नेताजी भी थे वर्ष 1922 में दासबाबू ने कांग्रेस के अन्तर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की और अंग्रेज़ सरकार का विरोध करने के लिए वो कलकत्ता महापालिका में महापौर बन गए और नेताजी को महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बनने का मौका मिला। यह कार्य नेताजी ने आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद किये थे।

उसके बाद बहुत जल्दी ही नेताजी एक महत्वपूर्ण युवा नेता बन गए, बाद में सुभाष जी ने जवाहरलाल नेहरू जी के साथ मिलकर युवकों की इण्डिपेण्डेंस लीग शुरू कर दी, 1927 में जब साइमन कमीशन भारत आया था तो उस समय नेताजी ने कोलकाता से इसका नेतृत्व किया था।

26 जनवरी 1931 को नेताजी ने कोलकाता में राष्ट्र ध्वज फहराकर और एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व किया उसी समय पुलिस ने उन पर लाठी चलायी और उन्हें घायल कर जेल भेज दिया। जब सुभाष जेल में थे उसी समय गाँधी जी ने अंग्रजों से समझौता किया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया, लेकिन अंग्रेजों ने भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने से साफ इन्कार कर दिया था, ऐसे में गाँधी जी ने भगत सिंह की फाँसी माफ कराने के लिये थोड़ी नरमी बरती जिसकी वजह से भगत सिंह को फांसी की सजा हो गयी, इसी बात पर नेताजी गाँधी से नाराज हो गए थे। सार्वजनिक जीवन में नेताजी को कुल 11 बार कारावास हुआ था।

रोचक जानकारी –

  • वर्ष 1933 से लेकर 1936 तक सुभाष यूरोप में रहे थे।
  • नेताजी इटली में वहां के नेता मुसोलिनी से मिले थे।
  • उसी समय आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष जी के काफी अच्छे दोस्त बन गये थे।
  • नेताजी यूरोप में ही विठ्ठल भाई पटेल से मिले थे।
  • सन् 1934 में इन्होने ऑस्ट्रिया की एक टाइपिस्ट महिला एमिली शेंकल से प्रेम विवाह किया था।
  • बताया जाता है की अगस्त 1945 में ताइवान में हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में सुभाष की मौत हुई थी, यह बात आज भी एक गूढ़रहस्य है।
  • इन्होने जर्मनी में प्रवास एवं हिटलर से मुलाकात भी की थी।

आज़ाद हिन्द फौज का गठन –

आज़ाद हिन्द फौज के बारे में सबसे पहले पहल राजा महेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा 29 अक्टूबर 1915 को अफगानिस्तान में की गयी थी, मूल रूप से उस वक्त यह आजाद हिन्द सरकार की सेना थी, जिसका लक्ष्य अंग्रेजों से लड़कर भारत को स्वतंत्रता दिलानी थी, उसी समय दक्षिण-पूर्वी एशिया में जापान के सहयोग द्वारा नेताजी सुभाषचंद्र बोस काफी लोगों (लगभग चालीस हजार से ज्यादा) भारतीय स्त्री-पुरुषों की प्रशिक्षित किया और एक नयी सेना बनायीं जिसका नाम “आजाद हिन्द फौज” रखा गया जिसका सुप्रीम कमांडर नेताजी को बनाया गया था।

नेताजी के महत्वपूर्ण नारे –

दिल्ली चलो।
“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूँगा” ।

नेताजी से जुड़ी और जानकारी के लिए आप विकिपीडिया और यूट्यूब पर देखें।

Subhas Chandra Bose Biography in Hindi से जुड़ी जानकारी आपको कैसी लगी?

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