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nelson mandela bio

इंडिया बायोग्राफी ब्लॉग में आपका स्वागत है, इस बायोग्राफी लेख में आपको साउथ अफ्रीकन गाँधी नेल्सन मंडेला के जीवन परिचय से जुड़ी जानकारी प्राप्त होगी, तो चलिए जानतें है कि कौन थे नेल्सन मंडेला ? नेल्सन मंडेला का जीवन और काम | nelson mandela, life, work (nelson mandela biography in hindi, wiki, age, quotes, family, books, short bio, bio books, life, dob & more)

Nelson Mandela Biography in Hindi – संछिप्त परिचय

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नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेज़ो, ईस्टर्न केप, साउथ अफ़्रीका संघ में गेडला हेनरी म्फ़ाकेनिस्वा और उनकी तीसरी पत्नी नेक्यूफी नोसकेनी के यहाँ हुआ था। इनका वास्तविक नाम नेल्सन रोलीह्लला मंडेला था। यह दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे। इनको साउथ अफ्रीका का गाँधी कहा जाता था।

व्यक्तिगत जीवन और परिवार – 

मंडेला ने अपने जीवन में तीन शादियाँ की थी, जिससे उनकी छह संतानें हुई थी, इनके परिवार में 17 पोते-पोती हैं। बताया जाता है कि वर्ष 1961 में मंडेला पर देशद्रोह का मुकदमा भी चलाया गया परन्तु उन्हें अदालत ने निर्दोष करार दिया था। वर्ष 1998 में इन्होने अपने 80वें जन्मदिन पर ग्रेस मेकल से विवाह किया था।

वास्तविक नाम – नेल्सन रोलीह्लला मंडेला
जन्म – 18 जुलाई 1918 को म्वेज़ो, ईस्टर्न केप, दक्षिण अफ़्रीका
मॉडेला जी महात्मा गांधी की तरह अहिंसक मार्ग के समर्थक थे।
राजनितिक पार्टी – अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस
पत्नी – एवलिन नटोको मेस, विनी मदिकिज़ेला और ग्राशा मैचल
बच्चे –
मेडिका थेमबेकल मंडेला
मैकज़िव मंडेला
मैकगाथो लेवानिका मंडेला
मैकज़िव मंडेला
ज़ेनानी मंडेला
ज़िनज़िस्वा मंडेला
गृहनगर – ह्यूटन एस्टेट, जोहानसबर्ग, गौटेंग, दक्षिण अफ़्रीका
शिक्षा – यूनिवर्सिटी ऑफ़ फोर्ट हेर से
धर्म – ईसाई (मेथोडिज़्म)
मृत्यु – 5 दिसम्बर 2013 (उम्र 95)
वेबसाइट – nelsonmandela.org

नेल्सन मंडेला की शिक्षा –

मंडेला ने अपनी शुरुआती शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल से पूरी की थी, उसके बाद इन्होने आगे की शिक्षा मेथोडिस्ट मिशनरी स्कूल से ली थी , बताया जाता है कि मॉडेला जब महज 12 वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। यह अपने पिता के संतानों में 13 भाइयों में तीसरे पर थे। इनके पिता हेनरी म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे।

नेल्सन मंडेला का राजनितिक सफर –

मंडेला के बारे में कहा जाता है की यह 1941 में जोहन्सबर्ग चले गये थे जहाँ इनकी मुलाकात वॉल्टर सिसुलू और वॉल्टर एल्बरटाइन से हुई थी, जिनसे राजनीतिक रूप प्रभावित होकर नेल्सन मंडेला ने जीवन यापन करने के लिए वहीं पर (जोहन्सबर्ग) एक कानूनी फ़र्म में क्लर्क बन गये थे। बाद में धीर-धीरे समय का पहिया बदला और उनकी सक्रियता राजनीति में बढ़ने लगी, ऐसे में मंडेला ने “रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव” को दूर करने के लिए राजनीति में कदम रखा था, यहीं से शुरू होता है मंडेला का राजनितिक सफर जो इनको साउथ अफ्रीका जैसे देश के राष्ट्रपति पद तक ले गया और यह 10 मई 1994 से 14 जून 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति रहे थे।

इनके जन्म दिवस के दिन को संयुक्त राष्ट्रसंघ ने नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मंडेला के बारे में कहा जाता है कि इन्होने रंगभेद के विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष की वजह से इनको 27 साल तक रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताना पड़ा था, जहाँ इन्होने कोयला खनिक का काम भी किया था, काफी लम्बा संघर्षपूर्ण रहा था नेल्सन मंडेला का जीवन।

मंडेला और मजदूर –

5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिये उकसाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया था, उनपर मुकदमा भी चला और अंततः उनको 12 जुलाई 1964 को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी। जेल में इन्होने अश्वेत कैदियों को लामबन्द करना शुरू किया था जीवन के 27 वर्ष इन्होने जेल में ही बिताये थे, अन्ततः 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई। उसके बाद इन्होने शान्ति की नीति द्वारा एक लोकतान्त्रिक एवं बहुजातीय अफ्रीका की नींव रखी थी।

वर्ष 1994 का वो दौर जब साउथ अफ़्रीका में रंगभेद रहित चुनाव हुए, जिसमे अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किये थे, जिसमे उनको बहुमत के साथ सरकार बनाने का अवसर मिला, इसी क्रम में 10 मई 1994 को नेल्सन मंडेला अपने देश के सर्वप्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने। अफ्रीका के नये संविधान को मई 1996 में संसद की ओर से सहमति मिली जिसके अन्तर्गत राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों की जाँच के लिये कई संस्थाओं की स्थापना की गयी। वर्ष 1997 में मंडेला सक्रिय राजनीति से अलग हो गये और दो वर्ष पश्चात् उन्होंने 1999 में कांग्रेस-अध्यक्ष का पद भी छोड़ दी थी।

मंडेला की विचारधारा –

इनके बारे में कहा जाता है की यह बहुत हद तक महात्मा गांधी की तरह अहिंसक मार्ग के समर्थक थे। इनको गांधी से प्रेरणा स्रोत माना जाता था इन्होने उनसे ही अहिंसा का पाठ सीखा था।

नेल्सन मंडेला की मृत्यु –

5 दिसम्बर 2013 का वह दौर जब फेफड़ों में संक्रमण हो जाने के कारण मंडेला की हॉटन, जोहान्सबर्ग स्थित अपने घर में मृत्यु हो गयी थी। उनकी मृत्यु की घोषणा राष्ट्रपति जेकब ज़ूमा ने की थी।

पुरस्कार एवं सम्मान –

साउथ अफ्रीकन लोग इनको व्यापक रूप से “राष्ट्रपिता” मानते थे। यह वहां के “लोकतन्त्र के प्रथम संस्थापक” भी माने जाते थे। इनको अफ्रीका का “राष्ट्रीय मुक्तिदाता और उद्धारकर्ता” भी माना जाता था। वर्ष 2004 में जोहनसबर्ग में स्थित सैंडटन स्क्वायर शॉपिंग सेंटर में मंडेला की मूर्ति स्थापित की गयी और नाम बदलकर नेल्सन मंडेला स्क्वायर रख दिया गया था।अफ्रीका में प्रायः मंडेला को मदीबा कह कर बुलाया जाता है जो बुजुर्गों के लिये एक सम्मान-सूचक माना जाता है। इनको विश्व के कई देशों और संस्थाओं द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान मिले थे।

  • वर्ष 1993 में इनको अफ्रीका में पूर्व राष्ट्रपति फ़्रेडरिक विलेम डी क्लार्क के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
  • इनको प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ़्रीडम का पुरस्कार भी मिल चूका है।
  • ऑर्डर ऑफ़ लेनिन के पुरस्कार से सम्मानित हो चुके थे मंडेला।
  • भारत रत्न पुरस्कार भी इनको मिला है।
  • निशान-ए–पाकिस्तान के पुरस्कार से भी इनको नवाजा जा चुका था।
  • 23 जुलाई 2008 को मंडेला को गाँधी शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

रोचक जानकारी (Nelson Mandela Biography in Hindi)

  • नेल्सन मंडेला विश्व भर में एक ख्याति प्राप्त नेता रहे हैं।
  • इन्होने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया और एक दिन साउथ अफ्रीका जैसे देश के राष्ट्रपति बने।
  • इनको अफ्रीकन लोग गाँधी के नाम से भी जानतें हैं।
  • इनका जीवन काल काफी लम्बा रहा था।
  • 95 वर्ष की उम्र में इनका निधन हुआ था।

Nelson Mandela Biography in Hindi से जुड़ी जानकारी आपको कैसी लगी?

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