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Bhagat Singh Biography In Hindi – भगत सिंह एक महान स्वतंत्रता सेनानी व क्रन्तिकारी ब्यक्ति थे। इन्होने भारत के क्रन्तिकारी आंदोलन को एक नई दिशा दी, पंजाब में क्रांति को लेकर भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा का गठन किया, हिंदुस्तान में गणतंत्र की स्थापना के लिए चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ का गठन करने में इनकी बहुत बड़ी भूमिका रही। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की हत्या की, उसके बाद बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर केन्द्रीय विधान सभा में बम फेका, यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे।

Bhagat Singh Biography In Hindi – (जीवनी)

Bhagat Singh Biography In Hindi

पूरा नाम – भगत सिंह
जन्म – 27 सितम्बर, 1907, पंजाब के नवांशहर जिले के खटकर कलां गावं के एक सिख परिवार
पिता – किशन सिंह
माता – विद्यावती
स्कूली शिक्षा – लाहौर के डी ऐ वी विद्यालय
परिवार – भगत सिंह का परिवार एक आर्य-समाजी सिख परिवार था।
आंदोलन में शामिल – असहयोग आंदोलन, साइमन कमीशन

विकिपीडिया पर देखेंभगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 27 सितम्बर, 1907, पंजाब के नवांशहर जिले के खटकर कलां गावं के एक सिख परिवार में हुआ था, बचपन से ही इनके अंदर देश भकित कूट – कूट कर भरी थी जिसकी वजह से यह देश सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहा करते थे। इनके जन्म के बारे में कुछ और बातें भी कही जाती है जैसे की इनका जन्म लायलपुर ज़िले के बंगा में (अब पाकिस्तान में) हुआ था पिता का नाम किशन सिंह और माता का विद्यावती था। भगत सिंह विद्यावती की तीसरी संतान थे।

Bhagat Singh Biography In Hindi स्कूली शिक्षा –

भगत सिंह 1916 में लाहौर के डी ऐ वी (DAV) विद्यालय में पढाई करते थे पढाई के दिनों में ही भगत सिंह जाने-पहचाने राजनेता जैसे लाला लाजपत राय और रास बिहारी बोस के साथ उठते बैठते थे यानि उनका संपर्क बड़े नेताओं से था। उसके बाद भगत सिंह ने बहुत सारे क्रन्तिकारी काम किये और भारत स्वतंत्र राष्ट्र बने इसके लिए उन्होंने देश के बड़े बड़े नेताओं और महान विचारों के साथ मिलकर देश को आजाद कराने में अपना योग्यदान दिया।

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड होने के बाद से भगत सिंह के मन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा, उनका मन इस भयंकर अमानवीय कृत को देखकर बहुत बिचलित हो गया और उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के बारे में मन बना लिया। इसके बाद वो चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी गतिविधियों और संगठनों पर काम करने लगे।

हलाकि अंग्रेजी हुकूमत ने उनको एक आतंकवादी घोषित किया था , पर भगत सिंह खुद आतंकवाद के आलोचक थे। उनका तत्कालीन लक्ष्य ब्रिटिश सरकार व साम्राज्य का विनाश करना था। अपनी एक अच्छी दूरदर्शिता और दृढ़ इरादे जैसी विशेषता के साथ भगत सिंह दूसरों से बहुत अलग देखे जाते थे। ऐसे समय में जब गाँधी जी ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए आजादी के एक विकल्प थे उस समय भगत सिंह एक दूसरे विकल्प के रूप में उभर कर सामने आये।

क्रन्तिकारी जीवन –

1921 में जब महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत की तब भगत सिंह ने अपनी पढाई छोड़कर उनके साथ आने का फैसला किया। और आंदोलन में सक्रिय हो गए। 1922 में गोरखपुर के चौरी-चौरा में हुई हिंसा के बाद असहयोग आंदोलन बंद करने पर वो बहुत उदास हो गए फिर लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित राष्ट्रीय विद्यालय में प्रवेश लिया। यह विधालय क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था और यहाँ पर वह भगवती चरण वर्मा, सुखदेव और दूसरे क्रांतिकारियों के संपर्क में आये।

एक बार की बात है भगत सिंह की शादी की बात चल पड़ी थी इसकी सूचना जैसे ही भगत सिंह को मिली वो कानपूर भाग गए थे। वहीँ पर उनकी मुलाकात गणेश शंकर विद्यार्थी नामक क्रांतिकारी से हुई उनके संपर्क में आकर भगत सिंह ने क्रांति का प्रथम पाठ सीखा। उसके बाद उनको, उनकी दादी की बीमारी का पता चला जिसके बाद वो घर वापस आ गए, जहाँ उन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखा, फिर वो लाहौर चले गए और ‘नौजवान भारत सभा’ नाम से एक क्रांतिकारी संगठन बनाया।

वर्ष 1928 में इंग्लैंड से साइमन कमीशन नामक एक आयोग भारत दौरे पर आया। उनके कामों को लेकर भारत के लोगों में विरोध था जिसकी वजह से अंग्रेजों ने लाला लाजपत राय पर क्रूरता पूर्वक लाठी चार्ज किया जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गए और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद भगत सिंह ने क्या किया उसके बारे में आपने ने ऊपर की लाइन में जरूर पढ़ा होगा।

लाहौर मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फाँसी की सज़ा सुनाई गई व बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह को 23 March 1931 की शाम 7:00 सुखदेव और राजगुरू के साथ फाँसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हँसते-हँसते देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

भगत सिंह बहुत ही अच्छे वक्ता, पाठक व लेखक भी थे। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख लिखा और उसका संपादन भी किया।

उनके द्वारा लिखी गयी मुख्य कृतियां कुछ इस प्रकार है ‘एक शहीद की जेल नोटबुक (संपादन: भूपेंद्र हूजा), सरदार भगत सिंह : पत्र और दस्तावेज (संकलन : वीरेंद्र संधू), भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज (संपादक: चमन लाल)।

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