Last Updated on August 31, 2026 by Virender Yadav
भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली द्रौपदी मुर्मु का जीवन संघर्ष, धैर्य और सफलता की प्रेरणादायक कहानी है। ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का उनका सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।
द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनका बचपन साधारण परिस्थितियों में बीता, लेकिन उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन में हमेशा महत्व दिया। आगे चलकर उन्होंने सरकारी नौकरी की, शिक्षिका के रूप में काम किया और फिर राजनीति में कदम रखा।
राजनीति में उनका सफर एक पार्षद के रूप में शुरू हुआ। इसके बाद वे विधायक बनीं, ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं और फिर झारखंड की राज्यपाल बनीं। वर्ष 2022 में उनके जीवन का सबसे बड़ा Turning Point आया, जब वे भारत की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गईं।
वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि यदि इंसान कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहे तो जीवन में बहुत ऊंचा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
परिचय (Quick Overview)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | द्रौपदी मुर्मु |
| जन्म | 20 जून 1958 |
| जन्म स्थान | उपरबेड़ा, मयूरभंज, ओडिशा |
| पिता | बिरंची नारायण टुडू |
| पति | श्याम चरण मुर्मु |
| बेटी | इतिश्री मुर्मु |
| शिक्षा | कला स्नातक |
| कॉलेज | रमादेवी महिला महाविद्यालय, भुवनेश्वर |
| पेशा | शिक्षिका, राजनेता |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी |
| पूर्व पद | झारखंड की राज्यपाल |
| वर्तमान पद | भारत की राष्ट्रपति |
| राष्ट्रपति पद | 15वीं राष्ट्रपति |
| शपथ | 25 जुलाई 2022 |
जन्म और शुरुआती जीवन
द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। वे संथाल आदिवासी समुदाय से आती हैं।
उनका परिवार सामान्य आर्थिक परिस्थितियों वाला था। गांव में उस समय शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं आज की तुलना में काफी सीमित थीं। ऐसे वातावरण में भी द्रौपदी मुर्मु ने पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया।
उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्य स्थानीय सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े हुए थे। बचपन से ही उन्होंने अपने आसपास के लोगों की समस्याओं को करीब से देखा। शायद यही कारण रहा कि आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में आने के बाद उनका झुकाव समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों के प्रति अधिक रहा।
द्रौपदी मुर्मु ने अपने गांव से बाहर जाकर उच्च शिक्षा हासिल की। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण कदम था, क्योंकि उस दौर में आदिवासी परिवार की लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं था।
शिक्षा
द्रौपदी मुर्मु की प्रारंभिक शिक्षा ओडिशा में ही हुई। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर गईं।
उन्होंने रमादेवी महिला महाविद्यालय, भुवनेश्वर से कला में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन किया।
उनकी शिक्षा उनके जीवन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण साबित हुई। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की और फिर शिक्षिका के रूप में भी कार्य किया।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को समाज में अपनी पहचान बनाने का अवसर भी देती है।
Career की शुरुआत
स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार के सिंचाई एवं बिजली विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में नौकरी की।
उन्होंने सरकारी कर्मचारी के रूप में कुछ वर्षों तक काम किया। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया।
वर्ष 1994 से 1997 के बीच उन्होंने रायरंगपुर के एक शिक्षण संस्थान में शिक्षिका के रूप में कार्य किया।
सरकारी कर्मचारी और शिक्षिका के रूप में काम करने के अनुभव ने उन्हें आम लोगों की समस्याओं को समझने का अवसर दिया। यही अनुभव बाद में उनके Political Career में भी काफी उपयोगी रहा।
राजनीति में प्रवेश
द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 1997 में राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने रायरंगपुर नगर निकाय से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और पार्षद बनीं। बाद में वे नगर निकाय की उपाध्यक्ष भी बनीं।
यह उनके राजनीतिक Career का शुरुआती दौर था। उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों के बीच रहकर काम किया और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी राजनीतिक यात्रा की खास बात यह रही कि उन्होंने सीधे किसी बड़े पद से शुरुआत नहीं की, बल्कि स्थानीय स्तर से आगे बढ़ते हुए एक-एक सीढ़ी चढ़ी।
विधायक बनीं
वर्ष 2000 में द्रौपदी मुर्मु रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से ओडिशा विधानसभा की सदस्य चुनी गईं।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2004 में भी विधानसभा चुनाव जीता। इस तरह वे दो बार विधायक रहीं।
विधायक के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े विषयों पर काम किया।
उनके राजनीतिक Career का यह दौर उनके लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसी दौरान उन्हें राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी काम करने का अवसर मिला।
मंत्री के रूप में कार्य
द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सरकार में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
उन्होंने वाणिज्य एवं परिवहन विभाग तथा मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास विभाग में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
मंत्री के रूप में काम करने के दौरान उन्हें प्रशासन और सरकारी व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिला।
वर्ष 2007 में उन्हें ओडिशा विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उनके राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
झारखंड की राज्यपाल बनीं
द्रौपदी मुर्मु के जीवन में एक और बड़ा Turning Point वर्ष 2015 में आया।
उन्हें 18 मई 2015 को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
वे झारखंड की पहली महिला आदिवासी राज्यपाल बनीं। उन्होंने वर्ष 2015 से 2021 तक राज्यपाल के पद पर कार्य किया।
राज्यपाल के रूप में उन्होंने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी समाज और सामाजिक विकास जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया।
राज्यपाल का पद संवैधानिक जिम्मेदारी वाला पद होता है और इस भूमिका में उन्होंने अपनी सादगी और शांत स्वभाव के कारण अलग पहचान बनाई।
राष्ट्रपति बनने का सफर
द्रौपदी मुर्मु के जीवन का सबसे बड़ा अध्याय वर्ष 2022 में शुरू हुआ।
भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया।
राष्ट्रपति चुनाव में उनका मुकाबला यशवंत सिन्हा से हुआ। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गईं।
25 जुलाई 2022 को उन्होंने भारत के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
उनके राष्ट्रपति बनने के साथ ही भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा।
भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति
द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति बनने की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि है।
वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उनकी सफलता विशेष रूप से उन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करते हैं।
द्रौपदी मुर्मु का जीवन बताता है कि शुरुआत चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, मेहनत और शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है।
परिवार
द्रौपदी मुर्मु का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है।
उनका विवाह श्याम चरण मुर्मु से हुआ था। उनके पति बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत थे।
उनकी बेटी का नाम इतिश्री मुर्मु है, जो बैंकिंग क्षेत्र में काम कर चुकी हैं।
द्रौपदी मुर्मु ने अपने निजी जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। परिवार के सदस्यों को खोने का दुख भी उनके जीवन में आया। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ती रहीं।
यही धैर्य उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक माना जाता है।
व्यक्तिगत जीवन में संघर्ष
द्रौपदी मुर्मु की कहानी केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं है।
उनके जीवन में ऐसे कई मौके आए जब परिस्थितियां उनके खिलाफ थीं। आर्थिक कठिनाइयों से लेकर व्यक्तिगत जीवन में बड़े दुखों तक, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
लेकिन उन्होंने कभी अपने जीवन को पूरी तरह परिस्थितियों के हवाले नहीं किया।
कठिन समय में उन्होंने आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा का सहारा लिया और आगे बढ़ती रहीं।
उनकी यही दृढ़ता आज उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक विशेषताओं में गिनी जाती है।
राष्ट्रपति के रूप में कार्य
राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, आदिवासी समाज और सामाजिक विकास जैसे मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
वे देश के अलग-अलग राज्यों और संस्थानों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही हैं।
राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्य संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़ा है। वे संसद के सत्रों को संबोधित करती हैं, विभिन्न संवैधानिक अवसरों पर देश को संबोधित करती हैं और विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व भी करती हैं।
2026 में द्रौपदी मुर्मु
वर्ष 2026 में द्रौपदी मुर्मु भारत की राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति पद पर अपने चार वर्ष पूरे किए।
इन चार वर्षों में वे देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा कर चुकी हैं और अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
उनका राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल अभी जारी है और वे संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं।
Leadership Style
द्रौपदी मुर्मु की Leadership Style को उनकी सादगी, धैर्य और संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जाता है।
उनकी राजनीतिक यात्रा स्थानीय निकाय से शुरू हुई और राष्ट्रपति भवन तक पहुंची।
उनके जीवन से तीन महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं—
पहली — शिक्षा का महत्व।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की।
दूसरी — संघर्ष में धैर्य।
व्यक्तिगत और सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा।
तीसरी — छोटी शुरुआत से बड़ी सफलता।
उनका राजनीतिक सफर पार्षद के रूप में शुरू हुआ और वे देश की राष्ट्रपति बनीं।
प्रमुख उपलब्धियाँ
द्रौपदी मुर्मु की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं—
- रायरंगपुर नगर निकाय की पार्षद रहीं।
- ओडिशा विधानसभा की सदस्य बनीं।
- ओडिशा सरकार में मंत्री के रूप में काम किया।
- 2007 में सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान प्राप्त किया।
- झारखंड की राज्यपाल बनीं।
- भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं।
- 25 जुलाई 2022 को भारत की 15वीं राष्ट्रपति बनीं।
- 2026 में राष्ट्रपति पद पर चार वर्ष पूरे किए।
Awards एवं सम्मान
सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार
वर्ष 2007 में द्रौपदी मुर्मु को ओडिशा विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के सम्मान से सम्मानित किया गया था।
मानद उपाधियां
राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें विभिन्न देशों और शिक्षण संस्थानों की ओर से कई सम्मान और मानद उपाधियां भी प्राप्त हुई हैं।
उनका सार्वजनिक जीवन लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करता रहा है।
द्रौपदी मुर्मु से जुड़े रोचक तथ्य
- उनका जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ।
- वे संथाल आदिवासी समुदाय से आती हैं।
- वे अपने गांव से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली शुरुआती महिलाओं में शामिल थीं।
- उन्होंने सरकारी कर्मचारी के रूप में काम किया।
- उन्होंने शिक्षिका के रूप में भी सेवाएं दीं।
- उनका राजनीतिक Career वर्ष 1997 में शुरू हुआ।
- वे दो बार ओडिशा विधानसभा की सदस्य रहीं।
- वे ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं।
- वे झारखंड की पहली महिला आदिवासी राज्यपाल बनीं।
- वे भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं।
- वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
- उन्होंने 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति पद पर चार वर्ष पूरे किए।
द्रौपदी मुर्मु की जीवन कहानी से क्या सीख मिलती है?
द्रौपदी मुर्मु का जीवन युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश देता है।
शिक्षा को प्राथमिकता दें
उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। उनकी सफलता में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संघर्ष से घबराएं नहीं
जीवन में व्यक्तिगत और आर्थिक कठिनाइयां आने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
छोटी शुरुआत से बड़ी सफलता संभव है
उनका राजनीतिक Career एक स्थानीय पार्षद के रूप में शुरू हुआ और वे देश की राष्ट्रपति बनीं।
अपनी जड़ों को न भूलें
राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे अपनी आदिवासी संस्कृति और अपनी जन्मभूमि से जुड़ी हुई दिखाई देती हैं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. द्रौपदी मुर्मु का जन्म कब हुआ था?
द्रौपदी मुर्मु का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था।
2. द्रौपदी मुर्मु भारत की कौन-सी राष्ट्रपति हैं?
द्रौपदी मुर्मु भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं।
3. द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति पद की शपथ कब ली?
उन्होंने 25 जुलाई 2022 को भारत के राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
4. द्रौपदी मुर्मु की शिक्षा कितनी है?
उन्होंने भुवनेश्वर के रमादेवी महिला महाविद्यालय से कला में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
5. द्रौपदी मुर्मु पहले क्या काम करती थीं?
उन्होंने ओडिशा सरकार के सिंचाई एवं बिजली विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में काम किया। बाद में वे शिक्षिका भी रहीं।
6. द्रौपदी मुर्मु राजनीति में कब आईं?
उन्होंने 1997 में राजनीति में प्रवेश किया और रायरंगपुर नगर निकाय की पार्षद बनीं।
7. द्रौपदी मुर्मु झारखंड की राज्यपाल कब बनीं?
उन्हें 18 मई 2015 को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
8. क्या द्रौपदी मुर्मु भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं?
हाँ, द्रौपदी मुर्मु भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं।
9. द्रौपदी मुर्मु के पति का नाम क्या था?
उनके पति का नाम श्याम चरण मुर्मु था।
10. द्रौपदी मुर्मु की बेटी का नाम क्या है?
उनकी बेटी का नाम इतिश्री मुर्मु है।
निष्कर्ष
द्रौपदी मुर्मु का जीवन परिचय संघर्ष और सफलता की ऐसी कहानी है, जो हर व्यक्ति को प्रेरित करती है। ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से निकलकर सरकारी कर्मचारी और शिक्षिका बनने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और धीरे-धीरे विधायक, मंत्री, झारखंड की राज्यपाल और फिर भारत की राष्ट्रपति बनीं।
25 जुलाई 2022 को भारत की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर उन्होंने इतिहास रचा। वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। वर्ष 2026 में भी वे राष्ट्रपति पद पर कार्यरत हैं और अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा, मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के सहारे व्यक्ति अपने सपनों को वास्तविकता में बदल सकता है।
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